बटाला {मीडिया प्रधान )
पंजाब में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव और पिछले करीब चार साल के तमाम नए पुराने एसएसपी साहिबान बधाई और सलाम के हकदार है जिन्होंने सत्ताधारियों के छोटे बड़े नेताओं को पुलिस थानों से कमाई नहीं करने दी पंजाब में कांग्रेस और अकाली भाजपा की समय समय की पूर्व सरकारों के समय मोहल्लों और गांवों में बैठे उनकी राजनीतिक पार्टी प्रधानों ने अपनी अपनी सरकार के समय पुलिस थानों पर एक तरह से कब्जा कर लिया था और गली मोहल्लों में रहते अपने राजनीतिक विरोंधियों के वर्करों पर झूठे पर्चे दर्ज करवाए। पुलिस थानों में इन राजनीतिक पार्टियों के प्रधानों के कहने पर ही पर्चे दर्ज होते थे और इन मोहल्ला छााप और गांव स्तर के नेताओं ने फर्जी पर्चे कटवाने की एवज में लाखों करोड़ों रुपये इक्टठे कर अपनी जेबें भरी।
आज पंजाब के ज्यादातर विधायकों के बारे में उनकी अपनी ही पार्टी यानी आम आदमी पार्टी के ज्यादातर वर्कर यह कहते सुने जा सकते हैं कि विधायक के पल्ले कुछ नहीं हैं या विधायक में किसी पर पर्चा दर्ज करवाने का दम खम नहीं हैं जैसे पहली सरकारोंं में कांग्रेस या अकाली भाजपा सरकार के समय उनके विधायकों में दम खम होता था।
बात तो सही है लेकिन वास्तव में आप के विधायकों में अत्याचाार करने का दम खम नहीं हैं फर्जी पर्चे करवा कर अपनी व अपने छुटभैयया नेताओं की जेबे भरने का दम खम नहीं है। विरोधी पार्टियों के वर्करों के बच्चों पर झूठे केस डाल कर उनकी जिंदगी बर्बाद करने का दम नहीं है। आप के वर्करों को यह समझना चाहिए कि अगद उनके विधायक मं यह यह दम खम नहीं है तो अच्छा है इसमें बुरा क्या हे।
ऐसा नहीं है कि आप के विधायकों ने पहली सरकारों की तरह थानों से नोट नहीं कमाए चाहे लेकिन पंजाब के सीएम भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी गौरव यादव व उनकी टीम के सामने उनकी एक नहीं चली।
झूठा पर्चा कहने को एक एफआईआर होती है लेकिन जिसके खिलाफ होती है उसका पूरा घर बर्बाद हो जाता हैं सालों जेल व अदालतों के चक्कर लगाते लगाते। और पूर्व की सरकारों में इस तरह के लाखोंं झूठे पर्चे दर्ज हुए लााखों घर बर्बाद हो गए और पिछली सरकारों के विधायकों और मोहल्ल छाप और गांव् स्तर के जत्थेदारों ने यह पाप करवा कर लाखों करोड़ों रुपये कमाए।
अकाली भाजपा गठबंधन की सरकार और कांग्रेस की सरकार को पंजाब में चुनाव आप ने नहीं हराया, उन्हें हराया उनके मोहल्ला छाप प्रधानों ने गांव स्तर के जत्थेदारों ने पुलिस का इस्तेमाल कर जुल्म की जो इंतहा की थी उसी के चलते हारें है ये सब।
ऐसा नहीं कि पंजाब मेंं बिलकुल भी झूठे पर्चे दर्ज नहीं हुए लेकिन उनकी गिनती कम है। राजनीतिक बदलाखोरी के तहत हुए पर्चे कम हुए है। कुछ जगह पर विधायकोंं ने निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों से दोस्ती गांठ कर जरूर कुछ एक पर्चे अपने खिलाफ चलने वालों के खिलाफ कटवाए है लेकिन पहली सरकारों में तो एसएसपी काबिलीयत के अधार पर नहीं बल्की विधायक की मर्जी का लगता था फिर एसएसपी अपनी मर्जी की थानों में टीम नहीं लगा सकता था। चाहे थाने का एसएचओ हो या डीएसपी ये सब निचले स्तर के सत्तधारी प्रधानों की मर्जी के लगते थे लेकिन आप के राज में ऐसी अंधेरगर्दी बिलकुल नही है। हां आप के जिन विधायकों ने निचले स्तर पर पुलिस वालों से दोस्ती गांठ कर झूठे पर्चे दर्ज करवाए उनकों जनता जवाब देगी उन्हें 2027 के आने वाले पंजाब में चुनाव हरा कर
